लकड़ी दरगाह सिवान जिला का एक बहुत famous गांव है जिसका वजह यहाँ की भौगोलिक स्थिति जिसके पश्चिम और उत्तर में गोपालगंज जिले का क्षेत्र पड़ता है इस गांव की जनसँख्या 10-15 हजार के आस पास होगी |
यह मुसलमानों के लिए तीर्थ स्थान का स्थान है। गांव को लकड़ी दरगाह इसलिए बुलाया जाता है क्योंकि यह दरगाह एक मुसलमान संत का है जिनका नाम शाह अरज़न था जिससे inspire होकर Local भाषा में लोग उन्हें अरजानी साहेब कहते है एवं वो पटना के थे। जब वे इस क्षेत्र से गुजर रहे थे तब उन्हें इस जगह पर एक अद्भुत energy (शक्ति ) का अहसास हुआ था जिसके चलते 40 दिनों तक उन्होंने यहाँ धार्मिक चिंतन(चीला ) किया था। उन्होंने एक धार्मिक प्रतिष्ठान भी स्थापित किया, जिसे सम्राट औरंगज़ेब ने संपन्न किया था। औरंगजेब का शासन काल 1658ईस्वी से 1707 ईस्वी तक था इस हिसाब से इस ये मुस्लिम tomb करीब 300 सौ साल के आस-पास का रहा होगा | तब से हर साल दिसंबर के महीने मे यहाँ मेला लगता है जिसे इस समय के दुनिया में Agrai का मेला कहा जाता है संत(शाह अरज़न) के मौत की सालगिरह हर साल रबी-उस -सनी के 11 वें दिन मनाई जाती है एवं इस दिन यहाँ काफी बड़ी भीड़ जमा होती है।
कैसे यहाँ पहुंचे ?
यहाँ पहुंचने के लिए आपको सिवान जिला मुख्यालय से 15km North दिशा में आना होगा | अगर गोपालगंज के तरफ से आ रहे है तो गोपालगंज से 13-14 km साउथ दिशा के तरफ आना होगा | जिससे आप लकड़ी दरगाह पहुंच पाएंगे |
Nearest Railway Station?
Hathua Railway Station ,Thawe railway station, Siwan Railway Station यहा के सब पास के रेलवे स्टेशन है

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